Wednesday, April 7, 2010

                              सोना
काठ बांस का बुनी 
  लोहे की कीलो से ठुकी
    खटिया पर पढ़ा, माया से घिरा
     सोना, सोना, तू करता है

सत्यम शिवम् सुन्दरम न दिखा
 परमात्मा का एहसास न किया
   आत्मा की आवाज़ को न सुना
    देख हाढ़ मॉस के पुतले को सोहना, सोहना तू करता है

मोह माया मै फंसा दुनिया को छला
   किया विश्वासघात न रब से डरा
    दुनिया की रंगीनियों मै फंसा
     न देख असलियत को माया के अँधेरे मै सोना, सोना करता है

आयेगा एक दिन,
जब तू होगा सांस बिन
  न सकेगा तेरा तन भी हिल
   पूछेगा रब की बता अब सोने से तू क्यों डरता है II

                  लेखक प्रवीण चंदर झांजी

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