सोना
काठ बांस का बुनी
लोहे की कीलो से ठुकी
खटिया पर पढ़ा, माया से घिरा
सोना, सोना, तू करता है
सत्यम शिवम् सुन्दरम न दिखा
परमात्मा का एहसास न किया
आत्मा की आवाज़ को न सुना
देख हाढ़ मॉस के पुतले को सोहना, सोहना तू करता है
मोह माया मै फंसा दुनिया को छला
किया विश्वासघात न रब से डरा
दुनिया की रंगीनियों मै फंसा
न देख असलियत को माया के अँधेरे मै सोना, सोना करता है
आयेगा एक दिन,
जब तू होगा सांस बिन
न सकेगा तेरा तन भी हिल
पूछेगा रब की बता अब सोने से तू क्यों डरता है II
लेखक प्रवीण चंदर झांजी
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment